संता पेड़ पर उल्टे लटके हुए था,
बंता ने पूछा – क्या हो गया?
संता- कुछ नहीं, सिर दर्द की गोली खाई है, कहीं पेट में ना चली जाए.!!
बीवी – सुनो जी, जब हमारी नयी नयी शादी हुई थी,
तो जब मैं खाना बना कर लाती थी तो तुम खुद कम खाते थे,
मुझे ज्यादा खिलाते थे।
संता – तो ?
बीवी – तो अब ऐसा क्यों नहीं करते ?
संता – क्यूंकि अब तुम अच्छा खाना बनाना सीख गयी हो….
बीवी – सुनो जी, जब हमारी नयी नयी शादी हुई थी,
तो जब मैं खाना बना कर लाती थी तो तुम खुद कम खाते थे,
मुझे ज्यादा खिलाते थे।
संता – तो ?
बीवी – तो अब ऐसा क्यों नहीं करते ?
संता – क्यूंकि अब तुम अच्छा खाना बनाना सीख गयी हो….
संता बड़ा परेशान था, बेचारे की शादी जो नहीं हो रही थी। हर बार शादी होते होते टूट जाती। सारे दोस्तों से पूछ लिया लेकिन कोई समाधान नहीं मिला।
बेचारा एक दिन एक पंडित जी के पास पहुंच गया और बोला- पंडित जी कोई उपाय बताए मेरी शादी नहीं हो रही हमेशा टूट जाती है।
पंडित जी ने कहा- शादी हो जाएगी, लेकिन सबसे पहले तुम लोगो से सदा सुखी होने का आशीर्वाद लेना बंद करो।
बंता ने पूछा – क्या हो गया?
संता- कुछ नहीं, सिर दर्द की गोली खाई है, कहीं पेट में ना चली जाए.!!
बीवी – सुनो जी, जब हमारी नयी नयी शादी हुई थी,
तो जब मैं खाना बना कर लाती थी तो तुम खुद कम खाते थे,
मुझे ज्यादा खिलाते थे।
संता – तो ?
बीवी – तो अब ऐसा क्यों नहीं करते ?
संता – क्यूंकि अब तुम अच्छा खाना बनाना सीख गयी हो….
बीवी – सुनो जी, जब हमारी नयी नयी शादी हुई थी,
तो जब मैं खाना बना कर लाती थी तो तुम खुद कम खाते थे,
मुझे ज्यादा खिलाते थे।
संता – तो ?
बीवी – तो अब ऐसा क्यों नहीं करते ?
संता – क्यूंकि अब तुम अच्छा खाना बनाना सीख गयी हो….
संता बड़ा परेशान था, बेचारे की शादी जो नहीं हो रही थी। हर बार शादी होते होते टूट जाती। सारे दोस्तों से पूछ लिया लेकिन कोई समाधान नहीं मिला।
बेचारा एक दिन एक पंडित जी के पास पहुंच गया और बोला- पंडित जी कोई उपाय बताए मेरी शादी नहीं हो रही हमेशा टूट जाती है।
पंडित जी ने कहा- शादी हो जाएगी, लेकिन सबसे पहले तुम लोगो से सदा सुखी होने का आशीर्वाद लेना बंद करो।
